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Hindi Baal Pothi (Bhag-4) - 764 Golok Store और महान संतों की लीलाएँ

Hindi Baal Pothi (Bhag-4) - 764 Golok Store और महान संतों की लीलाएँ( 4), , , , ,

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Description

और महान संतों की लीलाएँ और उपदेश शामिल हैं

एक बार कलकत्ते में उनकी मुलाकात श्रीरामसुखदासजी महाराज से हुई और उनके माध्यम से वह सेठ श्री जयदयाल जी से मिले। उनकी निष्ठा एकमात्र निराकार में थी। जयदयाल जी के परामर्श से बाबा गोरखपुर आकर गीताप्रेस और फिर गीतावाटिका गए। गोरखपुर की गीतावाटिका में हनुमान प्रसाद पोद्दार जी के साथ स्वामीजी रहा करते थे। स्वामी जी आगे चलकर श्री राधा बाबा के नाम से विख्यात हुए। कहते हैं कि बाबा को अद्वैत तत्व की साधना करते हुए सिद्धि मिली।

जो साधना और भक्ति के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालता है। इस पुस्तक में साधना की विधियाँ

जिससे साधक गीता के गूढ़ अर्थों को आसानी से समझ सकें और अपने जीवन में उन्हें आत्मसात कर सकें। स्वामी रामसुखदास जी की यह टीका विद्वत्ता प्रदर्शन की बजाय साधकों के कल्याण के उद्देश्य से लिखी गई है। इसमें शास्त्रार्थ की बजाय करुणा और सरलता से गीता के संदेश को प्रस्तुत किया गया है। यह टीका साधकों के लिए एक सच्चे मार्गदर्शक की तरह कार्य करती है

उत्तर से

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